Rimjhim Episode 78 छोटी उम्र में बड़ा सफ़र: कहानी वहीं से शुरू करते हैं जहां से कल इसका अंत हुआ था तो कल के एपिसोड में यह दिखाया गया था कि रिमझिम अब अपने फैसले को लेकर अटल हो चुकी है और सारी तैयारी के साथ वह आगे बढ़ रही है, साथ ही दादाजी भी इन सब में उसका पूरा साथ दे रहे हैं रिमझिम महल में एक दुल्हन की तरह रहने लगी है।
रिमझिम का बदला हुआ रूप
अगली सुबह जैसे ही वह पूजा के लिए मंदिर में जाती है सभी लोग साथ में आरती करते हैं लेकिन उसके साथ ही उसके पल्लू में आग लग जाती है और उसे समीर देखा है पर बुझाने से पहले उसके दिमाग में बहुत सारे ख्याल आने लगते हैं कि इसने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दिए मैं इसे क्यों बचाऊं पर इस समय अविक देख लेता है कि मेरी दीदी के पल्लू में आग लग गई है।

मंदिर में पूजा और अनहोनी
वह अपनी दीदी को बोलता है आपके पल्लू में आग लगी है दीदी चिल्लाता है और फिर वही मंदिर के पास गंगा जल रखा रहता है इस गंगाजल को पानी डालकर वह आग को बुझा देता है और फिर रिमझिम अपने कमरे में जाकर कपड़े बदल लेती है और उसके बाद जब वह बाहर जैसे ही जाने के लिए तैयार होती है उतने में अविक पहले समीर के पास जाता है।

अविक की सूझ-बूझ से बची रिमझिम
और कहता है कि रिमझिम दीदी को कुछ हो जाता तो आपने उन्हेंबचाया क्यों नहीं जवाब दो मेरे सवालों का तो इतने में वह कहता है कि मैंने कहा था कि मैं तुम्हारी दीदी को यहां से कहीं दूर भेजूंगा ना कि यह कहा था कि मैं उसे अपने साथ रखूंगा अब तुम्हारी दीदी का बुरा समय शुरू हो गया है ये बात जाकर उनसे कह दो तो अभी दौड़ते हुए अपनी बहन के पास जाता है और कहता है कि समीर आपसे बहुत गुस्से में है।
समीर से अविक का सवाल
दीदी तो आपको कभी भी चोट पहुंचा सकता है रिमझिम कहती है तू डर मत अविक मैं किसी से डरने वाले नहीं हूं मैं तेरे लिए पूरी दुनिया से लड़ जाऊंगी और यही सब देखते-देखते अविक ढोल बजाते हुए महल में नीचे आता है और इतने में दादाजी कहते हैं यह ढोल किस वजह से बजा रहे हो तो अविक कहता है कि महल की परंपरा है जब नई दुल्हन आती है तो मुंह दिखाई होती है।

मुंह दिखाई की भव्य तैयारी
तो मेरी दीदी की भी मुंह दिखाई होनी चाहिए तो दादाजी कहते हैं तुम भले ही छोटे हो लेकिन तुम्हारा दिमाग बिल्कुल एक राजा की तरह चलता है क्यों नहीं जरूर होनी चाहिए मुंह दिखाई की तैयारी शुरू होती है मेहमान बुलाए जाते हैं महल को एकदम अच्छे से सजाया जाता है और फिर जैसे ही रस्म की तैयारी शुरू होती है उतने में ही दादाजी समीर को अपने पास बुलाते हैं।

दादाजी का फैसला और कंगन
और कहते हैं कि यह कंगन तुम्हारी मां के हैं वह चाहते थे कि इन कंगनों को उनकी बहू पहेने तो तुम इस कंगन को रिमझिम को पहना दो पर समीर उस कंगन को रिमझिम को पहनने से पहले बहुत कुछ सोचता है कि क्या यह लड़की इस लायक है पर इस समय दादाजी कहते हैं पहनाओ और हर मन कर समीर को यह कंगन रिमझिम को पहनना ही पड़ता है।
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Rimjhim Episode 78 में रिमझिम को सबसे बड़ा खतरा किससे है?
Episode 78 में रिमझिम को सबसे बड़ा खतरा समीर से महसूस होने लगता है। मंदिर की घटना में समीर का रिमझिम को बचाने में हिचकिचाना उसकी नकारात्मक सोच को उजागर करता है। रिमझिम को अब साफ समझ आ जाता है कि उसका दुश्मन महल के अंदर ही मौजूद है। इसी वजह से वह हर कदम सोच-समझकर उठाने का फैसला करती है।
मुंह दिखाई की रस्म का कहानी में क्या महत्व है?
मुंह दिखाई की रस्म रिमझिम के महल में स्वीकार किए जाने का प्रतीक बनती है। दादाजी द्वारा समीर को उसकी मां के कंगन रिमझिम को पहनाने के लिए कहना एक भावनात्मक और अहम पल होता है। यह रस्म दिखाती है कि दादाजी रिमझिम के साथ खड़े हैं। साथ ही यह समीर की मजबूरी और अंदरूनी संघर्ष को भी उजागर करती है।
आने वाले तूफान का एहसास
और आज की कहानी में सबसे बड़ा ट्यूसडे की आने वाला है कि इस बार रिमझिम को पूरा अंदाजा हो जाता है कि दुश्मन मेरे आस-पास ही है अब मुझे हर कदम संभाल कर रखना पड़ेगा रिमझिम सभी चीजों को समझ कर करती है और वह जानती है कि मेरी एक गलती भी मुझे इस महल से बाहर निकल सकती है और यही समीर भी अपनी ढूंढता रहता है कि रिमझिम कहीं ना कहीं से अपनी गलतियों का सुबूत जरूर छोड़ दी होगी लेकिन रिमझिम बहुत चालाक थी वह अपनी गलतियों का सबूत कहीं भी नहीं छोड़ती है।

